शहर की हवा में डीजल बस का धुआँ दिखता है। सरकार का जवाब बिजली की बस है। 9 नवंबर 2025 की विज्ञप्ति कहती है, केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने मध्यप्रदेश के आठ नगर निगमों में 972 पीएम ई-बस सेवा मंजूर की है। मकसद नगरीय इलाकों में डीजल से पर्यावरण को होने वाला नुकसान रोकना।
शहरवार बँटवारा साफ है। भोपाल 195, इंदौर 270, ग्वालियर 100, जबलपुर 200, उज्जैन 100, सागर 32, देवास 55, सतना 20। जोड़ 972। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने निकायों को डिपो और चार्जिंग के काम जल्द पूरे करने को कहा। यानी फाइल मंजूर है, पहिया गिनना बाकी है।
पैसा कहाँ से आ रहा है?
डिपो की अधोसंरचना पर केंद्र 60 प्रतिशत, राज्य 40 प्रतिशत दे रहा है। चार्जिंग पॉइंट बनाने पर केंद्र की 100 प्रतिशत राशि लिखी गई है। यह अनुदान का ब्यौरा है। हर निगम का डिपो बन चुका हो, या 972 बसें सितंबर 2026 में सड़क पर हों—यह विज्ञप्ति नहीं कहती। कण इसे स्वीकृति की खबर मानता है, बेड़े की जनगणना नहीं।
तस्वीर किस बेड़े की है?
साथ वाली तस्वीर 19 जुलाई 2026 की कैबिनेट ई-बस की है। मुख्यमंत्री उसी दिन तीन बसों से जगदीशपुर गए। यह 972 की नगर निगम सूची का डिपो नहीं। दोनों खबरें बिजली की बस पर हैं; फोटो और फाइल अलग-अलग तारीख की हैं।
मुख्य बातें
- आठ निगम: भोपाल 195, इंदौर 270, ग्वालियर 100, जबलपुर 200, उज्जैन 100, सागर 32, देवास 55, सतना 20।
- बस डिपो: केंद्र 60 प्रतिशत, राज्य 40 प्रतिशत; चार्जिंग पॉइंट पर केंद्र की 100 प्रतिशत राशि।
- विज्ञप्ति कहती है अधोसंरचना तेजी से हो रही है और जल्द संचालन हो; कितनी बस उस दिन सड़क पर थीं, यह संख्या नहीं है।
स्रोत और संदर्भ
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।



