एक नाम, एक रकम। 2 अप्रैल 2026 को जनसंपर्क ने लिखा, विदिशा के निर्माण श्रमिक देवेंद्र शर्मा को औजार खरीदी अनुदान योजना में 5,000 रुपये मिले। मंडल कहता है, पंजीकृत श्रमिक बैंक ऋण से औजार खरीदें तो 10 प्रतिशत या अधिकतम पाँच हजार अनुदान मिलेगा। वेतन इसे एक पर्ची मानता है।
पात्रता साफ लिखी है। एमपीबीओसीडब्ल्यू में पंजीकृत निर्माण श्रमिक। आयु 60 से कम। लाभ जीवन में एक बार। औजार उसी कार्यक्षेत्र के हों। आवेदन गाँव में जनपद पंचायत, शहर में निकाय। ये नियम हैं। देवेंद्र शर्मा की उम्र, औजार की सूची, ऋण का बैंक—विज्ञप्ति नहीं खोलती।
तस्वीर किस वर्कशॉप की?
भीतरी चित्र उसी विज्ञप्ति से है। औजार और काम का फ्रेम दिखे तो भी यह वार्षिक वितरण समारोह नहीं। 18 सितंबर 2024 की श्रम समीक्षा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने औजार अनुदान को पीएम विश्वकर्मा से जोड़ने को कहा था। जुड़ाव इस अप्रैल की पंक्ति में नहीं आता। पाँच हजार एक श्रमिक के हैं।
मुख्य बातें
- आवेदन ग्राम पंचायत या नगरीय निकाय से; शर्तें मंडल की हैं, आय की स्वतंत्र जाँच इस विज्ञप्ति में नहीं।
- सरकारी भाषा “दक्षता बढ़ी, आय के नए अवसर” लिखती है; रकम पाँच हजार है।
- 18 सितंबर 2024 को मुख्यमंत्री ने इसी अनुदान को पीएम विश्वकर्मा से जोड़ने को कहा था—अलग निर्देश।
स्रोत और संदर्भ
- मध्य प्रदेश जनसंपर्क · औजार खरीदी अनुदान योजना- विदिशा के श्रमिक देवेंद्र शर्मा को ₹5000 की सहायता ↗2 अप्रैल 2026
सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 17 सितंबर 2026।



