मंडला के गुबरी गाँव में जमुना बाई मरावी ने 0.20 हेक्टेयर जमीन पर सब्जियाँ उगाईं और पास के बाजार में बेचीं। खेत तक पानी साझा सौर पंप से आता था। राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान, यानी NIRDPR, के मार्च 2022 के केस अध्ययन में यह अनुभव दर्ज है। गाँव के 15 परिवारों के लिए पंप एक सामुदायिक सुविधा था।

पंप का मालिक ग्राम संगठन

गुबरी का पाँच हॉर्सपावर पंप ग्राम संगठन के स्वामित्व में था। परिवार 50 रुपये प्रति घंटे की दर से सिंचाई का पानी लेते थे। इससे पानी लेने का समय और उसका भुगतान एक साझा व्यवस्था में आए। अध्ययन के अनुसार SLACC परियोजना के तहत मंडला जिले में लगभग 25 ऐसे पाँच-हॉर्सपावर पंप लगाए गए थे।

पास के उरदली गाँव में दस किसान दो पंपों से करीब 9.2 हेक्टेयर में गेहूँ, मटर, चना, मसूर और सरसों उगा रहे थे। ये अध्ययन में दर्ज स्थानीय परिणाम हैं। फसल और जमीन की जरूरत के हिसाब से सामूहिक सिंचाई की उपयोगिता अलग हो सकती है।

धूप के साथ रखरखाव भी

केस अध्ययन पंप की सीमाएँ भी बताता है। संचालन दिन में होता है; बादल, सर्दी, धूल और पेड़ों की छाया उत्पादन को प्रभावित करते हैं। उसमें नियमित पैनल-सफाई, बिजली गिरने से सुरक्षा, बाड़ और अतिरिक्त जल-संग्रह जैसे उपाय सुझाए गए हैं।

साझा सुविधा में मशीन लगाने के बाद भी काम रहता है: सफाई कौन करेगा, मरम्मत का खर्च कहाँ से आएगा और पानी लेने की बारी कैसे तय होगी। गुबरी की कहानी में तकनीक और ग्राम संगठन, दोनों की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है।

नई योजना का अलग रिकॉर्ड

मध्यप्रदेश के 17 फरवरी 2026 के कृषि विशेष में पुरानी मुख्यमंत्री सोलर पंप योजना को प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना में समाहित बताया गया। उसमें 2023-24 तक 21,129 नए पंप स्थापित दर्ज थे। 2025-26 में 52,000 पंप लगाने की कार्रवाई उस रिपोर्ट के समय प्रक्रियाधीन थी।

यह राज्य-स्तर की अलग प्रगति है। गुबरी का अनुभव पुराने SLACC अध्ययन का है; उसकी पानी-दर या साझा स्वामित्व को नई योजना की वर्तमान शर्त नहीं माना जाना चाहिए।

मुख्य बातें

  • गुबरी में 5 HP का पंप ग्राम संगठन के स्वामित्व में था; 15 परिवार 50 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से पानी लेते थे।
  • जमुना बाई मरावी ने 0.20 हेक्टेयर में सब्जियां उगाकर पास के बाजार में बेचीं—यह NIRDPR के मार्च 2022 दस्तावेज में दर्ज मामला है।
  • राज्य के 2026 कृषि विशेष में 2025-26 के 52,000 पंपों को प्रक्रियाधीन बताया गया है; उसे स्थापना या परिणाम नहीं माना गया।

स्रोत और संदर्भ

  1. National Institute of Rural Development and Panchayati Raj · Compendium of Best Practices for Rural Development — Irrigation by Solar Pump: A Case Study from Mandla District, Madhya Pradesh, India ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं
  2. मध्य प्रदेश जनसम्पर्क विभाग · कृषि विशेष – 2026 ↗17 फ़रवरी 2026

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

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